मेरठ: बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मेरठ की जिला अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने का मन बना लिया है। दोनों दोषियों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से संयुक्त अपील दाखिल करते हुए खुद को दोषसिद्धि और फांसी की सजा को निरस्त करने की मांग कर रहें है। दावा किया जा रहा है कि इन दोनों की तरफ से हाईकोर्ट में अपील दायर हुई है।
जल्द HC में दायर की जा सकती है अपील
वहीं, इस मामले में अभियोजन पक्ष के वकील कृष्णकांत चौबे का कहना है कि मुस्कान और साहिल की फांसी की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट भेजा गया है, अभी तक वहां से कंफर्मेशन नहीं आई है। सामान्यतः हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही अपील दायर होती है, हाईकोर्ट यदि फांसी की पुष्टि करता है तो फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाती है, लेकिन कोई चाहे तो पहले भी हाईकोर्ट जा सकता है।
नीले ड्रम वाला कांड क्या है?
गौरतलब है कि मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में हुए इस हत्याकांड ने प्रदेशभर में सनसनी फैला दी थी। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखकर सीमेंट और कंक्रीट से बंद कर दिया गया था। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था।
ट्रायल कोर्ट सुना चुका है फांसी की सजा
मामले की सुनवाई के दौरान मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने इसे Rare Of Rarest Category का मामला मानते हुए दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। साथ ही, दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। साक्ष्य छिपाने से संबंधित आरोपों में भी अदालत ने सजा सुनाई थी।
फैसले को बताया गैरकानूनी और मनमाना
ट्रायल कोर्ट के फैसले से असहमति जताते हुए दोनों दोषियों ने जेल से ही अपने वकीलों के जरिए हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने का दावा किया जा रहा है। अपील में निचली अदालत के आदेश को गैरकानूनी और मनमाना बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई है। अपीलकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि उनकी अपील स्वीकार करते हुए उन्हें भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), धारा 3(5) और धारा 238(ए) के तहत लगाए गए आरोपों से बरी किया जाए। अब इस मामले में हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के फैसले और अपील में उठाए गए कानूनी आधारों पर विचार किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता रखेंगे पक्ष
हाईकोर्ट में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला सहित अन्य वकील अपना पक्ष रखेंगे। दोनों की अपील यदि हाईकोर्ट में स्वीकार हो जाती है तो कोर्ट का क्या रुख रहेगा ये आने वाले समय में पता चलेगा। मृत्युदंड के मामले में हाईकोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान दोषसिद्धि और सजा की वैधता पर विचार कर सकता है।